चरनदासजी की बानी : जिस में उन के ग्रंथ के अति मनोहर और हृदय बेधक (i. e. बोधक) भजन, चौपाई, दोहे आदिक, कई प्राचीन हस्त लिखित पुस्तकों से चुन कर मुख्य 2 अंगों और रागों के अनुसार यथाक्रम रक्खे गये हैं और गूढ़ कड़ियों व कड़े या अनूठे शब्दों के अर्थ व संकेत भी नोट में लिख दिये गये हैं
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चरनदासजी की बानी : जिस में उन के ग्रंथ के अति मनोहर और हृदय बेधक (i. e. बोधक) भजन, चौपाई, दोहे आदिक, कई प्राचीन हस्त लिखित पुस्तकों से चुन कर मुख्य 2 अंगों और रागों के अनुसार यथाक्रम रक्खे गये हैं और गूढ़ कड़ियों व कड़े या अनूठे शब्दों के अर्थ व संकेत भी नोट में लिख दिये गये हैं
(संतबानी पुस्तक-माला)
बेलवेडियर प्रेस, [1908]
- 2. भाग
- タイトル別名
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Charandasji ki bani
- タイトル読み
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Caranadāsajī kī bānī : jisa meṃ una ke grantha ke ati manohara aura hr̥daya bedhaka (i.e. bodhaka) bhajana, caupāī, dohe ādika, kaī prācīna hasta likhita pustakoṃ se cuna kara mukhya 2 aṅgoṃ aura rāgoṃ ke anusāra yathākrama rakkhe gaye haiṃ aura gūṛha kaṛiyoṃ va kaṛe yā anūṭhe śabdoṃ ke artha va saṅketa bhī noṭa meṃ likha diye gaye haiṃ
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Poetry
In Awadhi
Pages also numbered 122-236 continuing the paging of the preceding issue.
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