धनञ्जय विजय : व्यायोग
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धनञ्जय विजय : व्यायोग
[s.n.], [19--]
- タイトル読み
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Dhanañjaya vijaya : vyāyoga
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注記
In Hindi
Bound up 9 vols in 1 vol. Except "प्रेमजोगिनी : नाटिका", originally published; बांकीपुर : "खङ्गविलास" प्रेस , 1905-1910. -- प्रेमजोगिनी : नाटिका: [S.l.] : [s.n.] , [19--]
収録内容
- Vedic killng is not a killing : a farce : in four plays / by Haris Chandra = वैदिकी हिंसा हिंसा न भवति : प्रहसन : चार अङ्कों में / हरिश्चन्द्र निर्मित
- भारतजननी : an opera / भारतेन्दु हरिश्चन्द्र ने संकलित किया
- सतीप्रताप : अर्थात् सावित्री सत्यवान के पौराणिक इतिहास का दृश्य रूपक / भारतेन्दु हरिश्चन्द्र विरचित
- कर्पूरमंजरी : सट्टक / भारतेंदु हरिश्चन्द्र विरचित
- प्रेमजोगिनी : नाटिका
- विषस्यविषमौषधम् : भाण = Poison case / हरिश्चन्द्र लिखित
- रत्नावली नाटिका : अर्थात् महाकवि कालिदास कृत रत्नावली नाटिका का भाषानुवाद : अपूर्ण / हरिश्चन्द्र कृत
- नीलदेवी : ऐतिहासिक गीतिरूपक / भारतेन्दु हरिश्चन्द्र कृत
